बिहार में क्यों घट रहा आम्रपाली आम का साइज, सामने आई चौंकाने वाली वजह, जानें बचाव के उपाय

डॉ. राजेंद्र प्रसाद कृषि विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डॉ. एस.के. सिंह बताते हैं कि यह सिर्फ देखभाल की कमी का मामला नहीं है. इसके पीछे मौसम में बदलाव, बढ़ती गर्मी, पानी की कमी और पोषण असंतुलन जैसे कई कारण एक साथ जिम्मेदार हैं.

बिहार में क्यों घट रहा आम्रपाली आम का साइज, सामने आई चौंकाने वाली वजह, जानें बचाव के उपाय
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डॉ. राजेंद्र प्रसाद कृषि विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डॉ. एस.के. सिंह बताते हैं कि यह सिर्फ देखभाल की कमी का मामला नहीं है. इसके पीछे मौसम में बदलाव, बढ़ती गर्मी, पानी की कमी और पोषण असंतुलन जैसे कई कारण एक साथ जिम्मेदार हैं.:

 मिथिलांचल में आम सिमिथिलांचल में आम सिर्फ एक फल नहीं, बल्कि किसानों की पहचान और उनकी आमदनी का बड़ा जरिया है. लेकिन पिछले कुछ वर्षों से आम उत्पादक किसान एक बड़ी समस्या से जूझ रहे हैं. बागों में आम का आकार लगातार छोटा होता जा रहा है. खासकर आम्रपाली किस्म के आम में यह परेशानी ज्यादा देखने को मिल रही है. कई बागानों में फल पहले की तुलना में 20 से 50 फीसदी तक छोटे पाए जा रहे हैं.

डॉ. राजेंद्र प्रसाद कृषि विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डॉ. एस.के. सिंह बताते हैं कि यह सिर्फ देखभाल की कमी का मामला नहीं है. इसके पीछे मौसम में बदलाव, बढ़ती गर्मी, पानी की कमी और पोषण असंतुलन जैसे कई कारण एक साथ जिम्मेदार हैं.र्फ एक फल नहीं, बल्कि किसानों की पहचान और उनकी आमदनी का बड़ा जरिया है. लेकिन पिछले कुछ वर्षों से आम उत्पादक किसान एक बड़ी समस्या से जूझ रहे हैं. बागों में आम का आकार लगातार छोटा होता जा रहा है. खासकर आम्रपाली किस्म के आम में यह परेशानी ज्यादा देखने को मिल रही है. कई बागानों में फल पहले की तुलना में 20 से 50 फीसदी तक छोटे पाए जा रहे हैं.


साल 2024 देश के सबसे गर्म वर्षों में शामिल रहा. बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश में अप्रैल से जून के बीच तापमान 44 से 47 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया. 2025 में मार्च महीने से ही लू चलने लगी. वहीं बारिश भी अनियमित रही, जिससे मिट्टी की नमी तेजी से खत्म हो गई. दिन और रात के तापमान में बड़ा अंतर देखने को मिला. इसका असर आम के विकास पर पड़ा और फलों को पूरी तरह बढ़ने का समय नहीं मिल पाया. हालांकि 2026 में मौसम कुछ बेहतर माना जा रहा है, लेकिन इसके बावजूद आम्रपाली किस्म के फल दूसरी किस्मों की तुलना में छोटे ही रह गए हैं.
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आम्रपाली में समस्या ज्यादा क्यों
आम्रपाली किस्म की खासियत यह है कि इसका पेड़ आकार में छोटा होता है, लेकिन इसमें फल ज्यादा लगते हैं. यही विशेषता अब इसकी कमजोरी बनती जा रही है. एक ही डाल पर जरूरत से ज्यादा फल लग जाने से पेड़ की ऊर्जा बंट जाती है. हर फल को पर्याप्त पोषण और पानी नहीं मिल पाता, जिससे उनका आकार छोटा रह जाता है.
छोटे फल होने के 6 बड़े कारण
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  • तेज गर्मी-40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर तापमान पहुंचने पर पत्तियां भोजन बनाने की प्रक्रिया धीमी कर देती हैं. इससे गूदे का विकास कम होता है और गुठली अपेक्षाकृत बड़ी रह जाती है.
  • पानी की कमी-अप्रैल से जून तक मिट्टी में पर्याप्त नमी जरूरी होती है. कम बारिश और लू के कारण मिट्टी सूख गई, जिससे फल सिकुड़ने लगे.
  • फलों का अधिक बोझ-एक डाल पर बहुत ज्यादा फल लगने से सभी फलों को पर्याप्त पोषण नहीं मिल पाता. शुरुआती अवस्था में कमजोर फलों की छंटाई नहीं करने पर बाकी फल भी छोटे रह जाते हैं.
  • असंतुलित खाद का इस्तेमाल-केवल यूरिया डालने से पेड़ हरा-भरा जरूर दिखता है, लेकिन फल का विकास सही नहीं होता. पोटाश, कैल्शियम, बोरॉन, गंधक और मैग्नीशियम जैसे पोषक तत्व भी जरूरी हैं.
  • घने बागान-समय पर पेड़ों की छंटाई नहीं होने से धूप और हवा अंदर तक नहीं पहुंचती. इससे पत्तियां कमजोर हो जाती हैं और भोजन बनने की प्रक्रिया प्रभावित होती है.
  • कमजोर होती मिट्टी-लगातार रासायनिक खाद के उपयोग से मिट्टी में जैविक कार्बन की मात्रा घट रही है. केंचुए कम हो रहे हैं और मिट्टी की पानी रोकने की क्षमता भी कमजोर पड़ रही है.
बचाव के 7 आसान उपाय
  • नियमित सिंचाई करें-फल बनने के समय हल्की-हल्की सिंचाई करते रहें और मिट्टी को सूखने न दें.
  • मल्चिंग अपनाएं-पेड़ के चारों ओर सूखी घास या पुआल बिछाने से मिट्टी की नमी लंबे समय तक बनी रहती है.
  • फलों की छंटाई करें-मटर के आकार के होने पर कमजोर फलों को हटा दें, ताकि बाकी फल अच्छे आकार में विकसित हो सकें.
  • संतुलित पोषण दें-सिर्फ यूरिया पर निर्भर न रहें. पोटाश और सूक्ष्म पोषक तत्वों का भी इस्तेमाल करें.
  • वैज्ञानिक तरीके से कटाई-छंटाई करें-हर साल फल तोड़ने के बाद सूखी और रोगग्रस्त डालियों को हटाएं, ताकि धूप और हवा का सही प्रवाह बना रहे.
  • जैविक खाद का उपयोग बढ़ाएं-गोबर खाद और केंचुआ खाद डालने से मिट्टी की उर्वरता और ताकत बढ़ती है.
  • गर्मी से बचाव करें-तेज लू के दौरान हल्की फुहार दें और पेड़ के तने पर सफेद रंग का लेप करें.
आगे की चुनौती
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि तापमान लगातार इसी तरह बढ़ता रहा तो आने वाले वर्षों में आम का आकार और छोटा हो सकता है. फल जल्दी पकेंगे, गूदे की मात्रा घटेगी और उनकी भंडारण क्षमता भी कम होगी. ऐसे में अब सिर्फ ज्यादा उत्पादन नहीं, बल्कि बेहतर आकार और गुणवत्ता पर भी ध्यान देना जरूरी हो गया है. डॉ. एस.के. सिंह का कहना है कि यदि किसान समय पर वैज्ञानिक तरीकों को अपनाएं तो आम्रपाली किस्म फिर से बड़े, मीठे और बाजार में अच्छी कीमत दिलाने वाले फल दे सकती है. उनके अनुसार छोटे होते फल इस बात का संकेत हैं कि अब खेती के तौर-तरीकों में बदलाव लाने की जरूरत है.

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Amita kishor
न्यूज़18इंडिया में कार्यरत हैं. आजतक से रिपोर्टर के तौर पर करियर की शुरुआत फिर सहारा समय, ज़ी मीडिया, न्यूज नेशन और टाइम्स इंटरनेट होते हुए नेटवर्क 18 से जुड़ी. टीवी और डिजिटल न्यूज़ दोनों विधाओं में काम करने क...और पढ़ें
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